मोहनलालगंज में रील बनाने का छात्रों पर चढ़ा खुमार, कॉलेज परिसर में नियमों की उड़ रही धज्जियां,
नवजीवन इंटर कालेज के प्रचार्य हरिगोबिन्द मिश्रा की कार्यशैली पर उठ रहे हैं सवाल,

शक्ति तिवारी मोहनलालगंज लखनऊ
मोहनलालगंज, लखनऊ। सोशल मीडिया पर रील बनाने का चलन अब छात्र-छात्राओं के बीच भी तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। मोहनलालगंज क्षेत्र स्थित नवजीवन इंटर कॉलेज में शैक्षणिक समय के दौरान छात्र-छात्राओं के रील बनाने में मशगूल रहने का मामला सामने आया है। कॉलेज परिसर में रील बनाने पर प्रतिबंध होने के बावजूद कुछ छात्र-छात्राओं द्वारा कथित तौर पर इसका पालन नहीं किया जा रहा है।बताया जा रहा है कि कॉलेज में पढ़ाई के लिए निर्धारित समय में कुछ छात्र-छात्राएं मोबाइल फोन से वीडियो और रील बनाने में व्यस्त नजर आते हैं। इससे जहां शिक्षण व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं, वहीं अभिभावकों के बीच भी चिंता का माहौल है।स्थानीय स्तर पर यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि यदि शैक्षणिक संस्थान के परिसर में ही छात्र-छात्राएं सोशल मीडिया कंटेंट बनाने में अधिक समय बिताएंगे तो इसका उनके अध्ययन और भविष्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा। सोशल मीडिया का संतुलित उपयोग जहां रचनात्मकता का माध्यम हो सकता है, वहीं पढ़ाई के समय इसका अनियंत्रित इस्तेमाल विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है।
प्रतिबंध के बावजूद नहीं थम रहा सिलसिला
कॉलेज परिसर में रील बनाने पर प्रतिबंध होने के बावजूद छात्रों की कथित मनमानी पर प्रभावी रोक नहीं लग पाने को लेकर कॉलेज प्रबंधन की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि शैक्षणिक समयावधि में भी कुछ विद्यार्थी वीडियो बनाने में व्यस्त रहते हैं और जिम्मेदार लोग इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं। इस पूरे मामले को लेकर नवजीवन इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य हरिगोबिन्द मिश्रा की कार्यशैली भी चर्चा में है। सवाल यह उठ रहा है कि जब कॉलेज परिसर में मोबाइल और रील बनाने को लेकर नियम निर्धारित हैं, तो उनका पालन सुनिश्चित कराने के लिए प्रबंधन की ओर से क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
पढ़ाई के माहौल पर पड़ सकता है असर
शिक्षा से जुड़े लोगों का मानना है कि विद्यालय परिसर विद्यार्थियों के अध्ययन, अनुशासन और व्यक्तित्व निर्माण का स्थान है। ऐसे में यदि विद्यार्थी नियमित कक्षाओं के दौरान सोशल मीडिया वीडियो बनाने में समय बिताते हैं तो इससे पढ़ाई का वातावरण प्रभावित हो सकता है।हालांकि, इस संबंध में कॉलेज प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष अभी सामने नहीं आया है। प्रबंधन की ओर से यदि कोई स्पष्टीकरण अथवा कार्रवाई की जानकारी दी जाती है तो उसे भी खबर में शामिल किया जा सकता है।फिलहाल कॉलेज परिसर में रील बनाने के मामले ने शैक्षणिक अनुशासन, विद्यार्थियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल और कॉलेज प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि कॉलेज प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और शैक्षणिक समय में सोशल मीडिया गतिविधियों पर किस तरह प्रभावी रोक लगाई जाती है।




