ग़मगीन माहौल में शहर-ए-अज़ा लखनऊ के नाज़िम साहब इमामबाड़े से निकला चेहल्लुम का जुलूस, लाखों अकीदतमंद हुए शामिल
मजलिस के बाद जैसे ही जुलूस रवाना हुआ, पुराने लखनऊ की गलियां और सड़कें "हाय हुसैन", "या हुसैन" और "लब्बैक या हुसैन" की सदाओं से गूंज उठीं,

विवेक कुमार दीपक ब्यूरो चीफ उत्तर प्रदेश
लखनऊ। शहर-ए-अज़ा लखनऊ में चेहल्लुम के मौके पर मंगलवार को नाज़िम साहब इमामबाड़े, चौक से हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और शोहदाए कर्बला की याद में पारंपरिक चेहल्लुम का अज़ादारी जुलूस ग़मगीन माहौल में निकाला गया। जुलूस से पहले प्रसिद्ध आलिम मौलाना कल्बे अहमद नक़वी ने मजलिस को ख़िताब किया और कर्बला के पैग़ाम पर रोशनी डाली।मजलिस के बाद जैसे ही जुलूस रवाना हुआ, पुराने लखनऊ की गलियां और सड़कें “हाय हुसैन”, “या हुसैन” और “लब्बैक या हुसैन” की सदाओं से गूंज उठीं। जुलूस में लाखों की संख्या में शिया समुदाय के अकीदतमंदों के साथ-साथ विभिन्न धर्मों के लोगों ने भी शिरकत कर गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल पेश की। जुलूस में बड़ी संख्या में महिलाओं और बच्चों ने भी भाग लिया। अकीदतमंदों ने हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और शोहदाए कर्बला को पुरसा पेश करते हुए मातम और नौहाख़्वानी की।यह पारंपरिक जुलूस चौक स्थित नाज़िम साहब इमामबाड़े से शुरू होकर नखास, बल्लौचपुरा चौराहा, बाज़ारखाला, एवरेडी चौराहा होते हुए तालकटोरा कर्बला पहुंचकर संपन्न होगा। चेहल्लुम के जुलूस को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम किए हैं। पूरे जुलूस मार्ग पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और चप्पे-चप्पे पर पुलिस की कड़ी निगरानी रखी जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभालने के लिए शासन और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी लगातार मौके पर मौजूद रहकर स्थिति का जायजा ले रहे हैं। चेहल्लुम के अवसर पर निकला यह ऐतिहासिक जुलूस पूरी अकीदत, अनुशासन और पारंपरिक शोक के माहौल में अपने निर्धारित मार्ग से होकर तालकटोरा कर्बला पहुंचेगा, जहां विभिन्न धार्मिक रस्मों के साथ इसका समापन होगा।




